A great piece by great poet..... Shiv Mangal Singh Suman
तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार
आज सिन्धु ने विष उगला है लहरों का यौवन मचला है
आज ह्रदय में और सिन्धु में साथ उठा है ज्वार
तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार
लहरों के स्वर में कुछ बोलो इस अंधड में साहस
तोलो कभी-कभी मिलता जीवन में तूफानों का प्यार
तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार
यह असीम, निज सीमा जाने सागर भी तो यह पहचाने
मिट्टी के पुतले मानव ने कभी ना मानी हार
तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार
सागर की अपनी क्षमता है पर माँझी भी कब थकता है
जब तक साँसों में स्पन्दन है उसका हाथ नहीं रुकता है
इसके ही बल पर कर डाले सातों सागर पार
तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार ।।
Wednesday, January 31, 2007
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